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कांच मंदिर जैसा कि नाम से स्पष्ट होता है, यह मंदिर पूरी तरह से कांच का बना है इसकी छत दीवारे व नीचे का तल भी कांच से जड़ा हुआ है |
इसे सेठ हुकुमचंद मंदिर के नाम से भी जाना जाता है | यह मंदिर सेठ हुकुमचंद द्वारा बनवाया गया था | श्री विक्रम सवंत १९७८ मिति आषाढ़ सुदी ७ सोमवार सन १९२१ में इसमें मूर्ति स्थापना कि गयी | यह एक दिगंबर जैन मंदिर है व इस मंदिर के मध्य में श्री शांतिनाथ भगवान व उनके दाहिने हाथ कि और श्री चंद्रप्रभा भगवान एवं बायीं और आदिनाथ भगवान विराजे है | शांतिनाथ भगवान कि मूर्ति काले पत्थर कि बनी है जिसे जयपुर में बनवाया गया | जिसमे अन्दर सारा कार्य कांच का किया हुआ है और यह कांच बेल्जियम से मंगाया गया था | व खम्भे लाल पत्थर के है इसका दरवाजा लकड़ी का बना हुआ है और उस पर चाँदी कि परत लगाई गयी है | इस मंदिर में कि गयी कारीगरी देखते ही बनती है यहाँ पर कारीगरी और कांच कि नक्काशी ईरान और जयपुर के कारीगरों द्वारा कि गयी है | इस मंदिर में कि गयी कांच कि नक्काशी और कारीगरी के कारण यहाँ 3D प्रभाव आता है | मंदिर सुबह १० बजे से शाम ५ बजे तक यह मंदिर आम जनता के लिए खुला रहता है |
मंदिर की कांच की नक्काशी से ५० से ज्यादा जैन धार्मिक कहानिया परिलक्षित होती है | व इसकी दीवारों पर की गयी नक्काशी में जैन धर्म कि कहानिया और तीर्थ स्थल के दृश्य बनाये गये है | यहाँ मंदिर शीतलामाता बाजार के करीब ही स्थित है |
 


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