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इंदौर में महात्मा गांधी पहली बार 29 मार्च 1918 में हिंदी साहित्य समिति के मानस भवन का शिलान्यास और दूसरी बार 20 अप्रैल 1935 में इसी भवन का उद्घाटन करने आए थे। समिति की स्थापना बापू की ही प्रेरणा से 1910 में हो गई थी।
समिति द्वारा 1918 में हुए हिंदी साहित्य सम्मेलन के आठवें अधिवेशन की अध्यक्षता गांधीजी ने की थी। समिति की जानकारी के मुताबिक सम्मेलन में आने से पहले उन्होंने समिति के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. सरजूप्रसाद तिवारी को एक पत्र लिखकर कुछ सवालों के उत्तर राष्ट्र से पूछने को कहा था।
बापू के ही शब्दों में : भाई सरजूप्रसादजी, आप इन दो प्रश्नों के उत्तर मान्य पुरुषों से तथा विद्वानों से मंगाकर रख छोड़ना ये दो प्रश्न हैं- हिंदी राष्ट्रभाषा होना चाहिए या नहीं, हमारी मातृभाषाओं में सर्वशिक्षा देना सही है या नहीं। गांधीजी की आज्ञा के मुताबिक लोगों से पूछा गया और इसी आधार पर उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की समिति की मांग का समर्थन किया था। बाद में संविधान निर्माताओं ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकृति दी।
शिलान्यास के दौरान महात्मा गांधी काठियावाड़ी वेशभूषा में आए थे। इस दौरान उनकी काठियावाड़ी पगड़ी आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। सन् 1935 में महात्मा गांधी तीन दिन शहर में रहे थे। 20 से 23 अप्रैल तक वे यहां ठहरे थे। इस दौरान समिति का 24वां हिंदी साहित्य सम्मेलन हुआ था जिसमें गांधीजी सभापति थे। उस वक्त के बिस्को पार्क (नेहरू पार्क) में आयोजित सम्मेलन गांधीजी ने फिर राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी की तरफदारी की थी।
सम्मेलन में महाराजा यशवंतराव होलकर ने इंदौर में हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की थी। समिति में महात्मा गांधी यातायात की परवाह किए बिना बैलगाड़ी में बैठकर आए थे।
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  1. बहुत अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

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