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खाने के मामले में इन्दोरियो का कोई सानी नहीं है | वह चाहे जलेबी-पोहा हो, चाट पकोडे हो, या फिर मुंग का हलवा हर तरह के व्यंजन को पसंद करने वाले इंदौर में रहते है | यहाँ हर गली या क्षेत्र में ऐसा एक कोना होता है जहा खाने-पीने का सामान मिलता है | हमने पिछले लेख में सराफा के बारे में बताया था इस बार बाकि जगहों के बार में जानते है:

छप्पन दुकान: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है यहाँ एक साठ छप्पन दुकान होने से यहाँ का नाम छप्पन दुकान हुआ | इसे युवाओ की पसंदीदा जगह कह सकते है | इन्दोर में जब भी कोई कलाकार आता है तो वह भी छप्पन दुकान आना नहीं भूलते है | यहाँ पर शाम को रौनक देखते ही बनती है | यहाँ आपको हॉट डॉग से लेकर साउथ इंडियन, पानीपुरी, चाइनीज़ सभी तरह के व्यंजन यहाँ उपलब्ध है | यहाँ की काफी को भीड़ में पीने का एक अलग ही लुत्फ़ है | यहाँ कई बार युवाओ की जन्मदिन की पार्टी भी हो जाया करती है इसके अतिरिक्त बहुत से इन्दोरियो के मिलने का स्थान भी है यह |

छावनी: छावनी को एक तरह से छात्रों का ही क्षेत्र माना जा सकता है क्योकि यहा पर कई होस्टल है, आसपास के क्षेत्र के छात्र भी यहाँ खाने के लिए आते है जिनमे नौलखा और भवरकुआ भी शामिल है | छावनी में ऐसी कई जगह है जहा कचोरी, समोसा से लेकर रबड़ी तक लाजवाब स्वाद में मिलते है | दवा बाजार, मथुरावाला की साबूदाना की खिचड़ी और अग्रवाल चाटवाला की चाट का तीखा स्वाद हर किसी की मुह में पानी ला सकता है | वही जगन्नाथ मिष्ठान्न भंडार की रबड़ी और मीठा का आसपास के क्षेत्र में कोई प्रतियोगी नहीं है |

सुखलिया चौपाटी: अगर आपको पलासिया से लेकर स्कीम न. ७८ तक किसी जगह पर कुछ खाने का मन हो रहा है तो आप पहुच जाइये विजयनगर की चौपाटी पर जो की मंगलसिटी के सामने जमती है | यहाँ सपरिवार चाइनीज़ से लेकर साऊथ इंडियन व्यंजन का लुत्फ़ लिया जा सकता है |

इसके अतिरिक्त बापट चौराहा भी एक चौपाटी के रूप में अपनी पहचान बना रहा है यहाँ आप शाम को ठेलो का संसार देख सकते है जहा आपको बर्फ के गोले से लेकर आइसक्रीम और खाने-पीने की तमाम तरह की चीजे एक साथ मिल जाती है |

देखिये NDTV की रिपोर्ट इंदौर के खान-पान के बारे में:
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  1. अरे साहेब आप शायद सराफा की दुकानों को भूल गए ! वहा पर इंदौर की सबसे ज्यादा अच्छी खाने पीने की चीजे मिलती हे !
    में दिल्ली में रहता हूँ और हर साल इंदौर जाता हूँ और सराफा जाना कभी नहीं भूलता !

    सतीश

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  2. सतीश जी शायद आपने मेरे लेख में सराफा बाज़ार की लिंक नहीं देखि या फिर देखी है तो पढ़ी नहीं | वैसे मेने सराफा पर एक लेख अलग से लिखा हुआ है इसकी लिंक है http://www.myindorecity.com/2010/11/18/indore-sarafa-bazar/

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  3. satishji,

    Indore k khanpan me aapka lekh pada. chhavni me aap Laxminarayan dhudh wale ko bhul gaye shayad.

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