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इंदौर की खूबसूरती बढ़ाने में इन्दोरियो की तासीर और रंगीन मिजाजी बहुत महत्वपूर्ण है | होली पुरे देश में जोश के साथ मनाई जाती है |
इंदौर में होली के इस धार्मिक पर्व को बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है और इस समय पर गेर निकाली जाती है | जिसमे शहर के सभी उम्र के लोग सम्मिलित होते है चाहे वे उम्रदराज हो, जोशीले नौजवान हो या फिर बच्चे | गेर का आयोजन शुरू करने का श्रेय इन्दोर में टोरी कार्नर को जाता है जिसमे रंगों को किसी टेंकर से भरकर भीड़ पर छीटा जाता है |
इंदौर में होली के दिन सबसे पहले सरकारी होली राजबाड़ा पर जलाई जाती है जिसकी पूजा अर्चना मल्हार मार्तण्ड मंदिर के पुजारी करते है |
इंदौर में और पुरे मालवा में रंगपंचमी को मनाया जाता है जो की होली के पांच दिन बाद मनाई जाती है | जो कसर होली पर बाकी रह जाती है उसे रंगपंचमी पर पूरा किया जाता है | रंगपंचमी खासकर इंदौर, उज्जैन, मंदसोर में और इनके आसपास के इलाको में खेली जाती है |
गेर की परंपरा १९४७ से टोरी कार्नर से शुरू हुई जिसका श्रेय बाबूलाल गिरी, छोटेलाल गिरी को दिया जा सकता है सियासी हलचल और शहर की प्रमुख गतिविधियों का केन्द्र रहे टोरी कार्नर की गेर ने रंगपंचमी की एक नयी परंपरा को जन्म दिया | हर जाती, धर्म औ हर सियासी पार्टी के नेता तथा समाज के साथ-साथ रंग उड़ाने के नए-नए अंदाज गेर में शामिल बड़ी मिसाइलो से लोगो को सराबोर करने की शुरुआत भी इस गेर के हिस्से में है|
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